Saturday, January 28, 2023
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Arif Mohammed Khan Says Governors Hold Chancellor Office Due To National Consensus, Not Sweet Will Of State Go – केरल के गवर्नर बोले: राष्ट्रीय सहमति के कारण चांसलर का पद संभालते हैं राज्यपाल, राज्य सरकारों की इच्छा से नहीं


आरिफ मोहम्मद खान

आरिफ मोहम्मद खान
– फोटो : PTI

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केरल में कुलपतियों की नियुक्ति का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने आज एक बार फिर से बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि विश्वविद्यालय में चांसलर की नियुक्ति राष्ट्रीय सहमति के कारण होती है न कि राज्य सरकार की इच्छा से। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद की अनुमति नहीं दी जा सकती है। अगर पिनाराई विजयन इस बात से अनभिज्ञ हैं कि उनके कार्यालय में क्या हो रहा है, तो वह एक अक्षम मुख्यमंत्री हैं।

विश्वविद्यालयों को उनके प्राचीन गौरव को बहाल करना होगा: राज्यपाल
राज्यपाल खान ने कहा कि विश्वविद्यालयों को उनके प्राचीन गौरव को बहाल करना होगा। उन्हें इस  भाई-भतीजावाद से मुक्त होना होगा। उन्होंने कहा कि चांसलर के रूप में उनका कर्तव्य यह सुनिश्चित करना था कि विश्वविद्यालयों में कोई कार्यकारी हस्तक्षेप न हो और यही कारण है कि राज्यपाल अपने पद के आधार पर चांसलर के पद पर बने रहते हैं।

केरल के अस्तित्व में आने से पहले से ही राज्यपाल विश्वविद्यालयों के चांसलर थे
राज्यपाल खान ने कहा कि 1956 में केरल के अस्तित्व में आने से पहले भी राज्यपाल विश्वविद्यालयों के चांसलर थे। यह कुछ ऐसा है जिस पर एक राष्ट्रीय सहमति बनी और एक राष्ट्रीय सम्मेलन विकसित हुआ। क्यों? ताकि विश्वविद्यालयों में कोई कार्यकारी हस्तक्षेप न हो और उनकी स्वायत्तता सुरक्षित रहे। आप किसी राष्ट्रीय सम्मेलन या राष्ट्रीय सहमति को भंग नहीं कर सकते। यह उनकी शक्ति से परे है। उन्हें कोशिश करने दें।

राज्यपाल ने चांसलर के पद से हटाने की कोशिश पर दिया जवाब
केरल सरकार द्वारा उन्हें चांसलर के पद से हटाने के लिए अध्यादेश और उस दिशा में अन्य कदमों के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में, खान ने कहा कि ये राज्य सरकार द्वारा हाल के अदालती आदेशों से ध्यान हटाने और शर्मिंदगी को ढंकने के प्रयास थे।  वे मूल रूप से अब क्या कर रहे हैं? वे न्यायिक फैसलों से खफा हैं और वे राज्यपाल का ध्यान भटकाना चाहते हैं। यदि वे कानून तोड़ते हैं, तो राज्यपाल पहले समीक्षा प्राधिकारी हैं, लेकिन यह अंततः अदालतों में जाएगा।

क्या है मामला?
दरअसल, केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों के विपरीत सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के मद्देनजर राज्य के नौ विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर से 24 अक्तूबर तक इस्तीफा देने को कहा था। राज्यपाल के इस आदेश के बाद केरल सरकार ने राजभवन के बाहर प्रदर्शन करने की धमकी दी थी। जिसके बाद राज्यपाल और भड़क गए।

विस्तार

केरल में कुलपतियों की नियुक्ति का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने आज एक बार फिर से बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि विश्वविद्यालय में चांसलर की नियुक्ति राष्ट्रीय सहमति के कारण होती है न कि राज्य सरकार की इच्छा से। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद की अनुमति नहीं दी जा सकती है। अगर पिनाराई विजयन इस बात से अनभिज्ञ हैं कि उनके कार्यालय में क्या हो रहा है, तो वह एक अक्षम मुख्यमंत्री हैं।

विश्वविद्यालयों को उनके प्राचीन गौरव को बहाल करना होगा: राज्यपाल

राज्यपाल खान ने कहा कि विश्वविद्यालयों को उनके प्राचीन गौरव को बहाल करना होगा। उन्हें इस  भाई-भतीजावाद से मुक्त होना होगा। उन्होंने कहा कि चांसलर के रूप में उनका कर्तव्य यह सुनिश्चित करना था कि विश्वविद्यालयों में कोई कार्यकारी हस्तक्षेप न हो और यही कारण है कि राज्यपाल अपने पद के आधार पर चांसलर के पद पर बने रहते हैं।

केरल के अस्तित्व में आने से पहले से ही राज्यपाल विश्वविद्यालयों के चांसलर थे

राज्यपाल खान ने कहा कि 1956 में केरल के अस्तित्व में आने से पहले भी राज्यपाल विश्वविद्यालयों के चांसलर थे। यह कुछ ऐसा है जिस पर एक राष्ट्रीय सहमति बनी और एक राष्ट्रीय सम्मेलन विकसित हुआ। क्यों? ताकि विश्वविद्यालयों में कोई कार्यकारी हस्तक्षेप न हो और उनकी स्वायत्तता सुरक्षित रहे। आप किसी राष्ट्रीय सम्मेलन या राष्ट्रीय सहमति को भंग नहीं कर सकते। यह उनकी शक्ति से परे है। उन्हें कोशिश करने दें।

राज्यपाल ने चांसलर के पद से हटाने की कोशिश पर दिया जवाब

केरल सरकार द्वारा उन्हें चांसलर के पद से हटाने के लिए अध्यादेश और उस दिशा में अन्य कदमों के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में, खान ने कहा कि ये राज्य सरकार द्वारा हाल के अदालती आदेशों से ध्यान हटाने और शर्मिंदगी को ढंकने के प्रयास थे।  वे मूल रूप से अब क्या कर रहे हैं? वे न्यायिक फैसलों से खफा हैं और वे राज्यपाल का ध्यान भटकाना चाहते हैं। यदि वे कानून तोड़ते हैं, तो राज्यपाल पहले समीक्षा प्राधिकारी हैं, लेकिन यह अंततः अदालतों में जाएगा।

क्या है मामला?

दरअसल, केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों के विपरीत सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के मद्देनजर राज्य के नौ विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर से 24 अक्तूबर तक इस्तीफा देने को कहा था। राज्यपाल के इस आदेश के बाद केरल सरकार ने राजभवन के बाहर प्रदर्शन करने की धमकी दी थी। जिसके बाद राज्यपाल और भड़क गए।





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