Thursday, February 9, 2023
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Bombay High Court Grants Bail To Anil Deshmukh In Corruption Case – Maharashtra: 13 महीने बाद जेल से बाहर निकलेंगे पूर्व मंत्री अनिल देशमुख, बॉम्बे हाईकोर्ट ने दी जमानत


अनिल देशमुख

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर भ्रष्टाचार के एक मामले में महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को जमानत दे दी। न्यायमूर्ति एम एस कार्णिक ने आठ दिसंबर को याचिका सुरक्षित रखने के बाद आज फैसला सुनाया। देशमुख एक साल से अधिक की न्यायिक हिरासत के बाद अब जेल से रिहा होंगे। बता दें कि देशमुख एक ही आरोप से उत्पन्न दो जांचों में उलझे हुए हैं – एक केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा भ्रष्टाचार के अपराध के लिए और दूसरा प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध के लिए। हालांकि देशमुख को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने 4 अक्तूबर को जमानत दे दी थी। लेकिन सीबीआई वाले मामले में, विशेष अदालत ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था और उसी को देशमुख ने उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी थी। 

देशमुख के वकील ने दिए ये तर्क
वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी और देशमुख की ओर से पेश अधिवक्ता अनिकेत निकम ने तर्क दिया कि चूंकि दोनों मामले जुड़े हुए हैं और चूंकि देशमुख को ईडी मामले में जमानत दी गई थी, इसलिए उन्हें सीबीआई मामले में जमानत दी जानी चाहिए। चौधरी ने तर्क दिया कि देशमुख ने कथित रूप से एक अपराध करने के लिए एक वर्ष से अधिक समय व्यतीत किया है, जो कि 7 साल तक के कारावास की सजा थी।  चौधरी ने अदालत को यह भी बताया कि विवादास्पद पूर्व मुंबई पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को सीबीआई के मामले में सरकारी गवाह बनाया गया है। हालांकि, उच्च न्यायालय ने ईडी मामले में देशमुख को जमानत देते हुए वाजे के बयानों की सत्यता पर संदेह जताया था।

सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने किया जमानत का विरोध
वहीं सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि मंत्री उच्चतम स्तर के भ्रष्टाचार में शामिल थे जिसने राज्य में शासन को प्रभावित किया। सिंह ने यह भी तर्क दिया कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दी गई जमानत विधेय अपराध (इस मामले में, भ्रष्टाचार मामले) में जमानत देने का आधार नहीं हो सकती है। सिंह ने बताया कि देशमुख को सीबीआई की प्राथमिकी को रद्द करने और डिफॉल्ट जमानत की मांग करने वाली याचिकाओं में राहत देने से इनकार कर दिया गया था। सिंह ने यह आशंका भी जताई कि एक प्रभावशाली व्यक्ति होने के नाते देशमुख मामले में लंबित जांच में हस्तक्षेप कर सकते हैं।

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर भ्रष्टाचार के एक मामले में महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को जमानत दे दी। न्यायमूर्ति एम एस कार्णिक ने आठ दिसंबर को याचिका सुरक्षित रखने के बाद आज फैसला सुनाया। देशमुख एक साल से अधिक की न्यायिक हिरासत के बाद अब जेल से रिहा होंगे। बता दें कि देशमुख एक ही आरोप से उत्पन्न दो जांचों में उलझे हुए हैं – एक केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा भ्रष्टाचार के अपराध के लिए और दूसरा प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध के लिए। हालांकि देशमुख को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने 4 अक्तूबर को जमानत दे दी थी। लेकिन सीबीआई वाले मामले में, विशेष अदालत ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था और उसी को देशमुख ने उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी थी। 

देशमुख के वकील ने दिए ये तर्क

वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी और देशमुख की ओर से पेश अधिवक्ता अनिकेत निकम ने तर्क दिया कि चूंकि दोनों मामले जुड़े हुए हैं और चूंकि देशमुख को ईडी मामले में जमानत दी गई थी, इसलिए उन्हें सीबीआई मामले में जमानत दी जानी चाहिए। चौधरी ने तर्क दिया कि देशमुख ने कथित रूप से एक अपराध करने के लिए एक वर्ष से अधिक समय व्यतीत किया है, जो कि 7 साल तक के कारावास की सजा थी।  चौधरी ने अदालत को यह भी बताया कि विवादास्पद पूर्व मुंबई पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को सीबीआई के मामले में सरकारी गवाह बनाया गया है। हालांकि, उच्च न्यायालय ने ईडी मामले में देशमुख को जमानत देते हुए वाजे के बयानों की सत्यता पर संदेह जताया था।

सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने किया जमानत का विरोध

वहीं सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि मंत्री उच्चतम स्तर के भ्रष्टाचार में शामिल थे जिसने राज्य में शासन को प्रभावित किया। सिंह ने यह भी तर्क दिया कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दी गई जमानत विधेय अपराध (इस मामले में, भ्रष्टाचार मामले) में जमानत देने का आधार नहीं हो सकती है। सिंह ने बताया कि देशमुख को सीबीआई की प्राथमिकी को रद्द करने और डिफॉल्ट जमानत की मांग करने वाली याचिकाओं में राहत देने से इनकार कर दिया गया था। सिंह ने यह आशंका भी जताई कि एक प्रभावशाली व्यक्ति होने के नाते देशमुख मामले में लंबित जांच में हस्तक्षेप कर सकते हैं।





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