Sunday, October 2, 2022
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कांग्रेस चिंतन शिविर: 24 साल में कांग्रेस ने ऐसे किए एक के बाद एक मजबूत एक्शन प्लान तैयार

राजनीति : कांग्रेस के 2022 का चिंतन शिविर आज से राजस्थान के उदयपुर में शुरू हो रहा है। इसके जरिए पार्टी की बड़े-बड़े एक्शन प्लान को आत्ममंथन कर एक के बाद एक मजबूत तरीके से तैयार करना है। सत्र की शुरुआत कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संबोधन से शुरू होगी ।

तथा राहुल गांधी के भाषण के साथ समाप्त होगी, करीब 500 प्रतिनिधियों को 70-70 सदस्यों के समूह में बांटा जाएगा ये सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण, राजनीतिक, पार्टी संगठन, आर्थव्यवस्था, किसान और युवाओं पर चर्चा करेंगे। ये सदस्य सत्र के बाद 15 मई को कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सामने अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे। 

हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस के बड़े दिग्गज मंथन के लिए शिविर में जुट रहे हैं। अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में इससे पहले भी साल 1998, 2003 और 2013 में भी बैठकें हो चुकी हैं। एक बार इन शिविरों के इतिहास पर नजर डालते हैं। 

1998, पचमढ़ी

सोनिया गांधी के नेतृत्व में पहला चिंतन शिविर मध्य प्रदेश के पचमढ़ी में आयोजित किया गया है। उस दौरान भी कांग्रेस आज की तरह कई चुनौतियों का सामना कर रही थी। सत्र के दौरान गठबंधन पार्टियों को अपना गढ़ नहीं सौंपने के फैसले के साथ हुआ। पार्टी ने फैसला किया कि उन्हें चुनाव जीतने के लिए गठबंधन की जरूरत नहीं है। उन्हें भरोसा था कि पार्टी अपने नेताओं के बल पर टिकी रहेगी।

2003, शिमला

पचमढ़ी शिविर के पांच सालों के बाद कांग्रेस को गठबंधन की अहमियत का एहसास हुआ। पार्टी ने ‘प्रगतिशील सोच वाले पुरुषों और महिलाओं, संस्थानों और सियासी आंदोलन के साथ’ गठबंधन की राह पर जाने का फैसला किया ‘जो भारत के इतिहास की हमारी समझ, भारत के मौजूदा हाल पर हमारी चिंताएं और ऐतिहासिक प्रयास में हमारे साथ जुड़ने के लिए भारत के भविष्य के हमारे नजरिए को साझा करता हो।’ 

साल 2003 के शिविर ने कांग्रेस को एक दशक तक सत्ता में बने रहने में मदद की। पार्टी ने अधिकारों पर आधारित शासन मॉडल तैयार किया, जिसमें मनरेगा, खाद्य सुरक्षा, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण और आरटीई शामिल थे।

2013, जयपुर

पार्टी को 2014 आम चुनाव से पहले एक बार फिर चिंतन शिविर की जरूरत महसूस हुई। इस सत्र को औपचारिक रूप से उपाध्यक्ष के तौर पर राहुल गांधी के कद बढ़ने के तौर पर देखा गया। पहली बार शिविर में पार्टी का युवा मोर्चा, NSUI और IYC शामिल हुई। 2022 से पहले वह पार्टी का आखिरी शिविर था और उस दौरान 2014 चुनाव का खाका तैयार किया गया था।

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