Tuesday, October 4, 2022
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Dhanteras 2020: धनतेरस कब है और धनतेरस पर्व तिथि व मुहूर्त 2020

धनतेरस कब है और इसे क्यों मनाया जाता है ? Dhanteras 2020 date, shubh muhurat

जानिए धनतेरस कब मनाया जाता है और इस पवित्र पर्व को मनाने के पीछे क्या परंपरा है साथ इस साल नवंबर २०२० में धनतेरस पर्व तिथि व मुहूर्त और पूजा विधि बारे में।

Dhanteras 2020 : “धनतेरस”, भारत के प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है। यह दिवाली उत्सव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह दिवाली त्योहार के पांच दिवसीय उत्सव का पहला दिन है। इस शुभ दिन को धनत्रयोदशी ओ या धन्वंतरि जयंती (आयुर्वेद के भगवान की जयंती) के रूप में भी मनाया जाता है। “धन” शब्द धन या धन का प्रतीक है और “तेरस” का अर्थ हिंदू कैलेंडर के अनुसार तेरहवें दिन है। “धनतेरस” का त्योहार पड़ता है। कृष्ण पक्ष के 13 वें चंद्र दिवस (काला पखवाड़ा) के “कार्तिक” (अक्टूबर-नवंबर) के हिंदू कैलेंडर महीने में, यह शुभ दिन रोशनी के त्योहार “दिवाली” से दो दिन पहले मनाया जाता है।

त्योहार “लक्ष्मी पूजा” के रूप में मनाया जाता है जो शाम को मिट्टी के दीपक (दीये) के रूप में किया जाता है। देवी लक्ष्मी की प्रशंसा में भजन के भक्ति गीत गाए जाते हैं और देवी को पारंपरिक मिठाइयों का “नैवेद्य” चढ़ाया जाता है। महाराष्ट्र में एक अजीबोगरीब रिवाज मौजूद है जहाँ लोग सूखे धनिया के बीज (धनेत्रयोदशी के लिए मराठी में धान) को गुड़ के साथ मिलाते हैं और मिश्रण को नैवेद्य के रूप में चढ़ाते हैं।

लोग धनतेरस पर क्यों खरीदे जाते हैं बर्तन

धनतेरस के दिन यानी की कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुंद्र मंथन से धन्वन्तरि प्रकट हुए। धन्वन्तरी जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथो में अमृत से भरा कलश था। भगवान धन्वन्तरी कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही इस दिन बर्तन, खासकर पीतल और चाँदी के बर्तन खरीदना चाहिए, क्योंकि पीतल महर्षि धन्वंतरी का धातु है।

धनतेरस पर्व तिथि व मुहूर्त 2020

Dhanteras इस बार धनतेरस 2020 13 नवंबर को पड़ेगा

दिन : शुक्रवार, 13 नवंबर 2020

धनतेरस पूजन मुर्हुत : शाम 05:25  बजे से शाम 05:59 बजे तक

प्रदोष काल : शाम 05:25 से रात 08:06  बजे तक

वृषभ काल : शाम 05:33 से शाम 07:29 बजे तक

धनतेरस की पूजा विधि

धनतेरस की पूजा संध्याकाल में करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। पूजा के स्थान पर उत्तर दिशा की ओर भगवान कुबेर और धन्वन्तरि की मूर्ति स्थापना कर उनकी पूजा करनी चाहिए उनके साथ ही माता लक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश की पूजा का विधान है। पूजा में फूल, फल, चावल, रोली, चंदन, धूप व दीप से इस पूजा को कीजिये। धनतेरस के अवसर पर यमदेव के नाम से एक दीपक निकालने तथा पूज्य नमन करने की भी परंपरा है।

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