Friday, December 9, 2022
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Jk: Residence Certificate Issuance Notification Withdraws – जम्मू कश्मीर: मतदाता बनने के लिए आवास प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश वापस, विपक्षी दलों ने जताया था विरोध


अवनी लवासा

अवनी लवासा
– फोटो : फेसबुक

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जिले में एक साल से अधिक समय से रह रहे लोगों का नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए तहसीलदारों को मौके पर आवास प्रमाणपत्र बनाने का उपायुक्त का आदेश विपक्ष के भारी दबाव के बीच 24 घंटे में ही वापस ले लिया गया। दरअसल मंगलवार को आदेश जारी किया गया था कि एक साल से अधिक समय से रह रहे लोगों को संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार मौके पर जाकर सत्यापन करने के बाद आवास प्रमाण पत्र जारी करें।

इसके बाद बुधवार को विभिन्न राजनीतिक दलों ने आदेश का विरोध करना शुरू कर दिया गया। देर रात आदेश को वापस ले लिया गया। जम्मू-कश्मीर में बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों से लोग व्यवसाय सहित अन्य कारणों से यहां रह रहे हैं।  

न्यूज एजेंसी एएनआई ने ट्वीट किया कि डीसी जम्मू ने तहसीलदारों को एक साल से अधिक समय से रह रहे लोगों को आवास प्रमाणपत्र जारी करने के आदेश को वापस ले लिया गया है। हालांकि, कई बार फोन करने के बाद भी डीसी अवनी लवासा की ओर से जवाब नहीं मिला।

उधर, डीसी के आदेश पर बुधवार को सुबह से ही विपक्षी दल लामबंद होने लगे। सबसे पहले पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट कर कहा कि जनसांख्यिकी में बदलाव की भाजपा साजिश रच रही है। इसके बाद कांग्रेस, नेकां, डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी ने भी विरोध किया।

विपक्षी दलों ने आशंका जताई कि चूंकि यहां बाहरी लोग भारी संख्या में रह रहे हैं। इस वजह से इन्हें मतदाता बनाने के लिए यह आदेश जारी किया गया है। जम्मू कश्मीर में 15 सितंबर से मतदाता सूची बनाने का काम शुरू हुआ है। 25 अक्तूबर तक यह काम चलेगा।

यह था आदेश

डीसी ने आदेश में कहा था कि चुनाव आयोग ने पानी, बिजली तथा गैस कनेक्शन की रसीद, आधार कार्ड, पास बुक, पासपोर्ट, भूमि रिकॉर्ड-किसान बही, किरायेनामा तथा घर की बिक्री का डीड मतदाता बनने के लिए आवश्यक दस्तावेज बताया है। हालांकि, इसमें कहा गया है कि वोटर के रूप में पंजीकरण के लिए आवास के अन्य सबूत भी मान्य होंगे।

यह भी निर्देश है कि यदि ऊपर वर्णित कोई दस्तावेज न हो तो मौके पर जाकर सत्यापन करना जरूरी है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई भारतीय नागरिक बेघर है और अस्थायी निवास का कोई दस्तावेज नहीं है तो अधिकारी मौके पर जाकर सत्यापन करेगा।

आदेश में कहा गया है कि पंजीकरण में लगे अधिकारियों ने यह महसूस किया कि कई योग्य मतदाता उपरोक्त दस्तावेजों के न होने से काफी परेशानी महसूस कर रहे हैं। इस वजह से तात्कालिक आवश्यकता को देखते हुए तथा कोई भी योग्य व्यक्ति मतदाता बनने से छूट न जाए, इसे ध्यान में रखते हुए सभी तहसीलदारों को अधिकृत किया जाता है कि वे एक साल से अधिक समय से रह रहे लोगों को मौके पर सत्यापन करते हुए आवास प्रमाणपत्र जारी करें। 

चुनाव आयोग का प्रावधान न होने से वापस लिया आदेश

चुनाव कार्यालय से जुड़े सूत्रों ने बताया कि चुनाव आयोग की ओर से ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया गया है कि एक साल से रह रहे लोगों को आवास प्रमाणपत्र जारी किया जाए। मतदाता के रूप में पंजीकृत होने के लिए सात तरह के दस्तावेज बिजली, पानी व गैस कनेक्शन, आधार कार्ड, पासबुक-पोस्ट आफिस खाता, पासपोर्ट,किसान बही-राजस्व विभाग का भूमि दस्तावेज, पंजीकृत किरायानामा व पंजीकृत सेल डीड जरूरी हैं। माना जा रहा है कि डीसी के आदेश की रिपोर्ट का चुनाव आयोग ने भी संज्ञान लिया। इसके बाद आदेश को वापस लेने का फैसल किया गया। 

विस्तार

जिले में एक साल से अधिक समय से रह रहे लोगों का नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए तहसीलदारों को मौके पर आवास प्रमाणपत्र बनाने का उपायुक्त का आदेश विपक्ष के भारी दबाव के बीच 24 घंटे में ही वापस ले लिया गया। दरअसल मंगलवार को आदेश जारी किया गया था कि एक साल से अधिक समय से रह रहे लोगों को संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार मौके पर जाकर सत्यापन करने के बाद आवास प्रमाण पत्र जारी करें।

इसके बाद बुधवार को विभिन्न राजनीतिक दलों ने आदेश का विरोध करना शुरू कर दिया गया। देर रात आदेश को वापस ले लिया गया। जम्मू-कश्मीर में बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों से लोग व्यवसाय सहित अन्य कारणों से यहां रह रहे हैं।  

न्यूज एजेंसी एएनआई ने ट्वीट किया कि डीसी जम्मू ने तहसीलदारों को एक साल से अधिक समय से रह रहे लोगों को आवास प्रमाणपत्र जारी करने के आदेश को वापस ले लिया गया है। हालांकि, कई बार फोन करने के बाद भी डीसी अवनी लवासा की ओर से जवाब नहीं मिला।

उधर, डीसी के आदेश पर बुधवार को सुबह से ही विपक्षी दल लामबंद होने लगे। सबसे पहले पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट कर कहा कि जनसांख्यिकी में बदलाव की भाजपा साजिश रच रही है। इसके बाद कांग्रेस, नेकां, डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी ने भी विरोध किया।

विपक्षी दलों ने आशंका जताई कि चूंकि यहां बाहरी लोग भारी संख्या में रह रहे हैं। इस वजह से इन्हें मतदाता बनाने के लिए यह आदेश जारी किया गया है। जम्मू कश्मीर में 15 सितंबर से मतदाता सूची बनाने का काम शुरू हुआ है। 25 अक्तूबर तक यह काम चलेगा।

यह था आदेश

डीसी ने आदेश में कहा था कि चुनाव आयोग ने पानी, बिजली तथा गैस कनेक्शन की रसीद, आधार कार्ड, पास बुक, पासपोर्ट, भूमि रिकॉर्ड-किसान बही, किरायेनामा तथा घर की बिक्री का डीड मतदाता बनने के लिए आवश्यक दस्तावेज बताया है। हालांकि, इसमें कहा गया है कि वोटर के रूप में पंजीकरण के लिए आवास के अन्य सबूत भी मान्य होंगे।

यह भी निर्देश है कि यदि ऊपर वर्णित कोई दस्तावेज न हो तो मौके पर जाकर सत्यापन करना जरूरी है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई भारतीय नागरिक बेघर है और अस्थायी निवास का कोई दस्तावेज नहीं है तो अधिकारी मौके पर जाकर सत्यापन करेगा।

आदेश में कहा गया है कि पंजीकरण में लगे अधिकारियों ने यह महसूस किया कि कई योग्य मतदाता उपरोक्त दस्तावेजों के न होने से काफी परेशानी महसूस कर रहे हैं। इस वजह से तात्कालिक आवश्यकता को देखते हुए तथा कोई भी योग्य व्यक्ति मतदाता बनने से छूट न जाए, इसे ध्यान में रखते हुए सभी तहसीलदारों को अधिकृत किया जाता है कि वे एक साल से अधिक समय से रह रहे लोगों को मौके पर सत्यापन करते हुए आवास प्रमाणपत्र जारी करें। 

चुनाव आयोग का प्रावधान न होने से वापस लिया आदेश

चुनाव कार्यालय से जुड़े सूत्रों ने बताया कि चुनाव आयोग की ओर से ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया गया है कि एक साल से रह रहे लोगों को आवास प्रमाणपत्र जारी किया जाए। मतदाता के रूप में पंजीकृत होने के लिए सात तरह के दस्तावेज बिजली, पानी व गैस कनेक्शन, आधार कार्ड, पासबुक-पोस्ट आफिस खाता, पासपोर्ट,किसान बही-राजस्व विभाग का भूमि दस्तावेज, पंजीकृत किरायानामा व पंजीकृत सेल डीड जरूरी हैं। माना जा रहा है कि डीसी के आदेश की रिपोर्ट का चुनाव आयोग ने भी संज्ञान लिया। इसके बाद आदेश को वापस लेने का फैसल किया गया। 





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