Tuesday, January 31, 2023
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Lac And China: Why Does China Not Accept Even The 108 Year Old Agreement? – Lac And China: 108 साल पुराने समझौते को भी क्यों नहीं मानता चीन? जानें अरुणाचल को लेकर ड्रैगन का प्रोपेगेंडा


भारत चीन सीमा विवाद

भारत चीन सीमा विवाद
– फोटो : अमर उजाला

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पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा है कि चीन इस मुगालते में न रहे कि भारत वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर उसे मुंहतोड़ जवाब नहीं देगा। तवांग में हुई झड़प के बाद उन्होंने कहा कि भारत चीन की हर गलत नीति का करारा जवाब देगा। इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद के दोनों सदनों में कहा कि चीन की सेना (पीएलए) ने 9 दिसंबर को अरुणाचल प्रदेश के तवांग क्षेत्र के यांग्त्से में LAC पर यथास्थिति बदलने की कोशिश की थी। इस कोशिश को हमारी मुस्तैद सेना ने बहादुरी से नाकाम कर दिया।  
LAC पर चीनी घुसपैठ की कोशिश जब भी होती है तब सीमा के निर्धारण नहीं होने का जिक्र होता है। कहा जाता है कि कुछ ऐसे इलाके हैं जिसे लेकर दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। तवांग में भी 2006 से ही दोनों पक्ष अपने दावे के मुताबिक उन इलाकों में गस्त करते हैं। इसके बाद भी अक्सर विवाद सामने आते हैं।
आखिर सीमा का ये विवाद कितना पुराना है? LAC क्या है? क्यों LAC होने के बाद भी दोनों पक्षों में विवाद होता रहता है? पूर्वी सीमा पर मैकमोहन लाइन की भी बात होती है क्या उसे लेकर भी विवाद है? चीन अरुणाचल को लेकर क्या दावा करता है और इसका क्या आधार बताता है? आइये जानते हैं….
 
सीमा विवाद कितना पुराना है?
चीन की सत्ता में आने के बाद कम्युनिस्ट सरकार ने चीन ने पूर्व में हुई सभी अंतरराष्ट्रीय संधियों से खुद को अलग कर लिया। कम्युनिस्ट सरकार ने इन संधियों को गैर-बराबरी की बताया और कहा कि इन्हें चीन पर थोपा गया है। इसके साथ ही चीन ने सभी अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के निर्धारण के लिए नए सिरे से बातचीत की मांग की।  
कम्युनिस्ट सरकार से पहले भारत और चीन के बीच कभी भी सीमाओं का रेखांकन नहीं हुआ था। जनवरी 1960 में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो ने भारत के सीमा को लेकर बातचीत शुरू करने का फैसला किया। दोनों देशों में आपसी सहमति से सीमा रेखांकन का फैसला हुआ। उसी साल अप्रैल में चीनी प्रमुख जो एनलाई और भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू इस मामले को लेकर मिले। अगले दो साल तक दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावों के हिसाब से सीमा पर सेना की तैनाती शुरू की। 1962 में हुए युद्ध के दौरान चीनी सेना ने भारत के दावे वाले कई इलाकों में कब्जा कर लिया।  
LAC क्या है?
भारत चीन के साथ 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। यह सीमा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से होकर गुजरती है। यह सीमा तीन सेक्टरों में बंटी हुई है। पश्चिमी (लद्दाख), मध्य (हिमाचल और उत्तराखंड) और पूर्वी (सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश)। हालांकि, चीन इस सीमा की लंबाई केवल 2,000 किलोमीटर के करीब मानता है। पश्चिम में चीन अक्साई चीन पर अपना दावा करता है। जो इस वक्त उसके नियंत्रण में है। भारत के साथ 1962 के युद्ध के दौरान चीन ने इस पूरे इलाके पर कब्जा किया था।
 वहीं, पूर्व में अरुणाचल प्रदेश के काफी हिस्से को चीन अपना बताता रहा है। चीन कहता है कि यह दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा है। चीन तिब्बत और अरुणाचल प्रदेश के बीच की मैकमोहन रेखा को भी नहीं मानता है। वह अक्साई चीन पर भारत के दावे को भी खारिज करता है। मध्य सेक्टर में दोनों देशों के बीच सबसे कम विवाद है। 
इन विवादों की वजह से दोनों देशों के बीच कभी सीमा निर्धारण नहीं हो सका। हालांकि यथास्थिति बनाए रखने के लिए लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी टर्म का इस्तेमाल किया जाने लगा। हालांकि अभी ये भी स्पष्ट नहीं है। दोनों देश अपनी अलग-अलग लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल बताते हैं। एलएसी के साथ लगने वाले कई ऐसे इलाके हैं जहां अक्सर भारत और चीन के सैनिकों के बीच तनाव की खबरें आती रहती हैं।

मैकमोहन लाइन क्या है और चीन इसे क्यों नहीं मानता?
 1914 में उत्तर पूर्वी भारत और तिब्बत के बीच सीमा का निर्धारण करने के लिए शिमला में एक सम्मेलन हुआ। इस सम्मेलन में तिब्बत, चीन और भारत (ब्रिटिश इंडिया) के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बातचीत के बाद हुए समझौते पर भारत और तिब्बत ने हस्ताक्षर किए। लेकिन, चीनी अधिकारियों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर के इनकार कर दिया। 1914 में हुए शिमला समझौते के बाद भारत के विदेश सचिव सर हेनरी मैकमोहन ने भारत तिब्बत सीमा के रूप में 890 किलोमीटर की सीमा का रेखांकन किया। उनके नाम पर ही इस सीमा को मैकमोहन लाइन नाम रखा गया। हालांकि, चीन ने इस सीमा को खारिज कर दिया। चीन तिब्बत को संप्रभु राष्ट्र नहीं मानता है। उसका कहना है कि तिब्बत संप्रभु राष्ट्र नहीं है ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय सीमा को लेकर समझौता करने का उसके पास कोई अधिकार नहीं है।
चीन अरुणाचल को लेकर क्या दावा करता है और इसका क्या आधार बताता है?
पूरे अरुणाचल प्रदेश समेत करीब 90 हजार वर्ग किलोमीटर के इलाके पर चीन अपना दावा करता है। इस इलाके को वह जेंगनैन कहता है और इसे दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है। अपने मैप में भी वह अरुणाचल प्रदेश को चीन के हिस्से के रूप में दिखाता है। कभी-कभी चीनी मैप में इसे तथाकथित अरुणाचल प्रदेश के रूप में भी दर्शाया जाता है। 
इस भारतीय इलाके पर अपना दावा जताने के लिए चीन समय-समय पर कई तरह की हरकतें करता रहा है। 2017 में अपने इन्हीं मंसूबो के तहत अरुणाचल के छह इलाकों के चीनी नाम प्रकाशित किए। 2021 में इसे और बढ़ाते हुए ऐसे 15 नाम और प्रकाशित किए गए।  
चीन के इन नामों को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया। पिछले साल विदेश मंत्रालय ने इस पर कहा था कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है और आगे भी रहेगा। अरुणाचल प्रदेश के इलाकों को इस तरह का नाम देने से सच्चाई नहीं बदलेगी।
आखिर कुल कितने वर्ग किलोमीटर भूक्षेत्र को लेकर भारत-चीन में विवाद है?
मार्च 2020 में विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने संसद में बताया था कि पूर्वी क्षेत्र में चीन अरुणाचल प्रदेश राज्य में लगभग 90 हजार वर्ग किलोमीटर के भारतीय भूक्षेत्र पर अपना दावा करता है। इसी तरह पश्चिमी क्षेत्र के लद्दाख में लगभग 38 हजार वर्ग किलोमीटर का भारतीय भूक्षेत्र चीन के कब्जे में है। इसके अलावा 2 मार्च 1963 को चीन और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित तथाकथित चीन-पाकिस्तान ‘सीमा करार’ के तहत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के 5 हजार 180 वर्ग किलोमीटर के भारतीय भूक्षेत्र को अवैध रूप से चीन को सौंप दिया था। ये सभी इलाके भारत का अभिन्न अंग हैं। इस तथ्य को भारत की ओर से कई मौकों पर चीन को भी स्पष्ट रूप से बताया जा चुका है।

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पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा है कि चीन इस मुगालते में न रहे कि भारत वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर उसे मुंहतोड़ जवाब नहीं देगा। तवांग में हुई झड़प के बाद उन्होंने कहा कि भारत चीन की हर गलत नीति का करारा जवाब देगा। इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद के दोनों सदनों में कहा कि चीन की सेना (पीएलए) ने 9 दिसंबर को अरुणाचल प्रदेश के तवांग क्षेत्र के यांग्त्से में LAC पर यथास्थिति बदलने की कोशिश की थी। इस कोशिश को हमारी मुस्तैद सेना ने बहादुरी से नाकाम कर दिया।  

LAC पर चीनी घुसपैठ की कोशिश जब भी होती है तब सीमा के निर्धारण नहीं होने का जिक्र होता है। कहा जाता है कि कुछ ऐसे इलाके हैं जिसे लेकर दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। तवांग में भी 2006 से ही दोनों पक्ष अपने दावे के मुताबिक उन इलाकों में गस्त करते हैं। इसके बाद भी अक्सर विवाद सामने आते हैं।

आखिर सीमा का ये विवाद कितना पुराना है? LAC क्या है? क्यों LAC होने के बाद भी दोनों पक्षों में विवाद होता रहता है? पूर्वी सीमा पर मैकमोहन लाइन की भी बात होती है क्या उसे लेकर भी विवाद है? चीन अरुणाचल को लेकर क्या दावा करता है और इसका क्या आधार बताता है? आइये जानते हैं….

 





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