Tuesday, January 31, 2023
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Lucknow : 190 Doctors Are Sitting At Home Waiting For The Transfer To Be Canceled – Lucknow : तबादला निरस्त होने के इंतजार में अस्पताल छोड़ घर बैठे हैं 190 डॉक्टर, मरीजों की मुसीबत


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– फोटो : अमर उजाला

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प्रदेश में करीब 190 डॉक्टर तबादला निरस्त होने का इंतजार कर रहे हैं। इसमें लेवल एक से लेकर लेवल चार तक के डॉक्टर हैं। ये अस्पतालों में कार्य करने के बजाय घर बैठे हैं। इसमें कोई बीमारी का हवाला दे रहा है तो कोई दाम्पत्य नीति का। डॉक्टरों और विभागीय अफसरों की लड़ाई में मरीज पिस रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है।

प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरोंं की कमी जग जाहिर है। रही सही कसर तबादले ने पूरी कर दी है। प्रदेश में करीब 12 हजार डॉक्टर हैं। जून माह में करीब 2400 डॉक्टरों का स्थानांतरण किया गया। इसे लेकर जमकर बवाल हुआ। तबादला सूची में गड़बडी को लेकर अलग- अलग कमेटियां बनाई गईं। तबादला कमेटी में शामिल चिकित्साधिकारियों के खिलाफ भी जांच बैठाई गई, लेकिन नतीजा सिफर रहा। इतना जरूर हुआ कि कुछ डॉक्टरों के तबादले निरस्त किए गए। लेकिन करीब 190 अभी भी अधरझूल में हैं। इनमें कोई दाम्पत्य नीति का हवाला देकर तबादले को गलत ठहरा रहा है तो कोई बीमारी का हवाला देकर तबादला निरस्त करने की मांग कर रहा है।

इतना ही नहीं 26 जुलाई को विशेष सचिव डा. मन्नान अख्तर ने लेवल एक के 89 डॉक्टरों की सूची जारी करते हुए स्थनांतरण निरस्त अथवा संशोधित करने के लिए महानिदेशालय से पत्रावलियां मंगवाई। महानिदेशालय ने सूची का सत्यापन करने के बाद रिपोर्ट शासन में भेज दी। इसकेबाद भी अभी तक इस सूची में शामिल डॉक्टरों के तबादले पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसी तरह लेवल तीन और चार केभी तमाम डॉक्टरों ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मिक सेक्शन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि तबादले की जद में आने वाले करीब 190 डॉक्टरों ने अभी तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। ऐसे में इनका वेतन भी रोक दिया गया है। क्योंकि इन सभी का नई तैनाती वाले स्थान से वेतन जारी होना है।

केस 1
डा. रवि गुप्ता मुख कैंसर से पीड़ित हैं। इनका तबादला मथुरा के वृंदावन सीएचसी से अलीगढ़ कर दिया गया है। पत्नी मथुरा में ही कार्यरत हैं। ऐसे में डा. रवि बीमारी की वजह से मथुरा में ही कार्य करने की अनुमति मांग रहे हैं।

केस 2-
फर्रुखाबाद में कार्यरत डा. शिव प्रकाश का तबादला ललितपुर और उनकी पत्नी डा. सुनीता का तबादला हरदोई कर किया गया है। जबकि दाम्पत्य नीति केतहत दोनों को एक ही जिले में भेजा जाना चाहिए।

क्या कहती हैं जिम्मेदार
तबादला सूची में शामिल कुछ डॉक्टरों ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। कुछ डॉक्टरों के तबादले बीच-बीच में निरस्त हुए हैं। इनके बारे में रिपोर्ट तैयार की गई है। कार्यभार ग्रहण करने के बाद ही वेतन जारी किया जाएगा। मामले से संबंधित रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब इस मामले में सभी फैसले शासन स्तर से होंगे।
– डॉ. लिली सिंह महानिदेशक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा

मुख्यमंत्री ने भी भरोसा दिया है कि दांम्पत्य, बीमार और संगठन के पदाधिकारियों का तबादला निरस्त किया जाए। ऐसे में शासन से मांग है कि जल्द से जल्द तबादला निरस्त कर अस्पताल की व्यवस्था सुचारू की जाए।
डॉ. अमित सिंह, महासचिव यूपीपीएमएस एसोसिएशन

विस्तार

प्रदेश में करीब 190 डॉक्टर तबादला निरस्त होने का इंतजार कर रहे हैं। इसमें लेवल एक से लेकर लेवल चार तक के डॉक्टर हैं। ये अस्पतालों में कार्य करने के बजाय घर बैठे हैं। इसमें कोई बीमारी का हवाला दे रहा है तो कोई दाम्पत्य नीति का। डॉक्टरों और विभागीय अफसरों की लड़ाई में मरीज पिस रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है।

प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरोंं की कमी जग जाहिर है। रही सही कसर तबादले ने पूरी कर दी है। प्रदेश में करीब 12 हजार डॉक्टर हैं। जून माह में करीब 2400 डॉक्टरों का स्थानांतरण किया गया। इसे लेकर जमकर बवाल हुआ। तबादला सूची में गड़बडी को लेकर अलग- अलग कमेटियां बनाई गईं। तबादला कमेटी में शामिल चिकित्साधिकारियों के खिलाफ भी जांच बैठाई गई, लेकिन नतीजा सिफर रहा। इतना जरूर हुआ कि कुछ डॉक्टरों के तबादले निरस्त किए गए। लेकिन करीब 190 अभी भी अधरझूल में हैं। इनमें कोई दाम्पत्य नीति का हवाला देकर तबादले को गलत ठहरा रहा है तो कोई बीमारी का हवाला देकर तबादला निरस्त करने की मांग कर रहा है।

इतना ही नहीं 26 जुलाई को विशेष सचिव डा. मन्नान अख्तर ने लेवल एक के 89 डॉक्टरों की सूची जारी करते हुए स्थनांतरण निरस्त अथवा संशोधित करने के लिए महानिदेशालय से पत्रावलियां मंगवाई। महानिदेशालय ने सूची का सत्यापन करने के बाद रिपोर्ट शासन में भेज दी। इसकेबाद भी अभी तक इस सूची में शामिल डॉक्टरों के तबादले पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसी तरह लेवल तीन और चार केभी तमाम डॉक्टरों ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मिक सेक्शन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि तबादले की जद में आने वाले करीब 190 डॉक्टरों ने अभी तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। ऐसे में इनका वेतन भी रोक दिया गया है। क्योंकि इन सभी का नई तैनाती वाले स्थान से वेतन जारी होना है।

केस 1

डा. रवि गुप्ता मुख कैंसर से पीड़ित हैं। इनका तबादला मथुरा के वृंदावन सीएचसी से अलीगढ़ कर दिया गया है। पत्नी मथुरा में ही कार्यरत हैं। ऐसे में डा. रवि बीमारी की वजह से मथुरा में ही कार्य करने की अनुमति मांग रहे हैं।

केस 2-

फर्रुखाबाद में कार्यरत डा. शिव प्रकाश का तबादला ललितपुर और उनकी पत्नी डा. सुनीता का तबादला हरदोई कर किया गया है। जबकि दाम्पत्य नीति केतहत दोनों को एक ही जिले में भेजा जाना चाहिए।

क्या कहती हैं जिम्मेदार

तबादला सूची में शामिल कुछ डॉक्टरों ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। कुछ डॉक्टरों के तबादले बीच-बीच में निरस्त हुए हैं। इनके बारे में रिपोर्ट तैयार की गई है। कार्यभार ग्रहण करने के बाद ही वेतन जारी किया जाएगा। मामले से संबंधित रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब इस मामले में सभी फैसले शासन स्तर से होंगे।

– डॉ. लिली सिंह महानिदेशक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा

मुख्यमंत्री ने भी भरोसा दिया है कि दांम्पत्य, बीमार और संगठन के पदाधिकारियों का तबादला निरस्त किया जाए। ऐसे में शासन से मांग है कि जल्द से जल्द तबादला निरस्त कर अस्पताल की व्यवस्था सुचारू की जाए।

डॉ. अमित सिंह, महासचिव यूपीपीएमएस एसोसिएशन





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