Tuesday, October 4, 2022
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कैसे Japan का एक कार्गो जहाज़ से तेल रिसाव के कारण Mauritius में लगी इमरजेंसी।

Mauritius Oil Spills – एक महाद्वीप है जो पयर्टको का मनपसंद स्थल जहां हर साल 2 करोड़ से ज्यादा टूरिस्ट घूमने और यहाँ के बीच का आनंद लेने आते है। अगर आप Mauritius गए होंगे तो आप इस बात को भली भांति जानते होंगे की चारो और समुद से घिरे इस देश के लिए समुद्र और और तटीय इलाक़े का क्या महत्त्व होगा। पर प्रशासन लापरवाई और सरकारी ढीले पन से इस महाद्वीप और इस पर रहने वाले लाखों स्थनीय निवासिओं का भविष्य खतरे में पड़ गया है ।

ऐसा तब हुआ जब जापान एक जहाज M V Wakashio जिसका स्वामित्व Nagasaki Shipping जिसे Mitsui OSK Lines Ltd द्वारा संचालित किया जाता है, एक दिन यह जहाज़ जो कोरल रीफ के चट्टान से टकराया जिसके परिणामस्वरूप हिंद महासागर में 1,000 टन से अधिक तेल फैल गया। जहाज में अनुमानित करीब 4,000 टन तेल ले जा रहा था। जिसके बाद से पुरे मॉरिशस के समुद्री क्षेत्र में तेल का रिसाव हो गया और जिससे समुद में रहने वाले हज़ारो प्रकार के जीव का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। हालात यह है रोजाना वहां लाखों मछलियां और अनेक जीव तटीय क्षेत्र पर मरे हुए मिलते है।

Mauritius oil spill

मॉरिशस के प्रधानमंत्री प्रवीण जुगनुथ ने अपने तट के पास तेल रिसाव पर राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की है और तेल साफ़ करने का काम को प्राथमिकता तथा कई देश जैसे भारत, इंग्लैंड, जापान से मदद मांगी है। पर अभी तक जापानीज जहाज M V Wakashio से पूरी तरह से तेल को बहार नहीं निकला गया नतीज़न यह जहाज दो हिस्सों में टूट गया जिससे शेष 90 टन तेल वही समुद में फ़ैल गया।

मॉरिशस की सरकार और प्रधानमंत्री प्रवीण जुगनुथ के प्रति वहां के स्थानीय लोगों में काफी ज्यादा गुस्सा है की सही समय पर अगर करवाई की जाती तो स्थिति इतनी भयानक नहीं होती। पर फिर भी मॉरिशस की जनता एकजुटता दिखाते हुए तेल निकाल ने के काम में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रही है। और तेल निकालने के लिए गन्ने, कपडे, बांध बनाके इस काम को किया जा रहा है।

अगर US National Oceanic and Atmospheric Administration (NOAA) की माने तो तेल फैलने से समुद्री जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है जो कोरल रीफ को ब्लीच करके उन्हें नष्ट करता है और भोजन और आवास के स्रोतों को नष्ट करता है। इसके अलावा, पक्षी और समुद्री जीव हाइपोथर्मिया से मर सकते हैं। साथ आसपास के तटीय क्षेत्रों की जमीन भी बंजर हो जाती है। और जिन लाखों परिवार का रोजगार इससे जुड़ा होता वो पूरी तरह से समाप्त हो जाता है।

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