Thursday, February 2, 2023
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Rajasthan Politics: Minister Of Pilot Camp Attacks Gehlot, Gudha Says– Party Should Fulfill Promise Over Cm – Rajasthan Politics: पायलट खेमे के मंत्री का गहलोत पर हमला, गुढ़ा बोले- सीएम पर हाईकमान पूरा करें अपना वादा


राजेंद्र गुढ़ा और अशोक गहलोत

राजेंद्र गुढ़ा और अशोक गहलोत
– फोटो : Social Media

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भले ही कांग्रेस आलाकमान ने राजस्थान के नेताओं पर बयानबाजी न करने का शिकंजा कसा हो, नेता है कि मान ही नहीं रहे। अब सचिन पायलट के समर्थक माने जाने वाले राज्यमंत्री राजेंद्र सिहं गुढ़ा ने अशोक गहलोत खेमे पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने सीधे-सीधे शांति धारीवाल, महेश जोशी और धर्मेंद्र राठौड़ पर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही कहा कि मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर आलाकमान ने जो वादा किया था, उसे पूरा करने का समय आ गया है। 

इशारों-इशारों में गुढ़ा ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को राजस्थान के मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर जल्द फैसला लेना चाहिए। अगर फैसला नहीं हुआ तो उनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल उठेंगे। कांग्रेस आलाकमान को अपनी विश्वसनीयता बचानी है तो उसे तुरंत सीएम पर फैसला लेना होगा। इससे पहले प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पार्टी के नेताओं को बयानबाजी न करने की हिदायत दी थी।  

राजस्थान के सैनिक कल्याण राज्यमंत्री गुढ़ा ने कहा कि राजनीतिक बगावत के लिए धारीवाल, महेश जोशी और धर्मेंद्र राठौड़ जिम्मेदार हैं। उनके खिलाफ अनुशासन समिति ने नोटिस जारी किया था। उस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे आम कार्यकर्ताओं को पता चलेगा कि पार्टी अनुशासन से चलेगी। बगावत करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गुढ़ा ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा था कि एक-दो दिन में प्रदेश के सीएम का फैसला कर देंगे। इसके अलावा प्रदेश के सभी मामलों को खत्म कर दिया जाएगा। प्रदेश के उलझे हुए मामले को समाप्त कर कांग्रेस के आम कार्यकर्ताओं को यह जताने का प्रयास करना चाहिए कि अब निर्णय तत्काल होंगे। इसका सीधा फायदा हिमाचल और गुजरात के चुनाव में पार्टी को मिलेगा।

धारीवाल-जोशी ने कांग्रेस विधायकों की बैठक का बहिष्कार किया था
धारीवाल और जोशी को गहलोत खेमे का माना जाता है। उन्होंने 25 सितंबर को कांग्रेस विधायक दल की बैठक का बहिष्कार किया था। इन नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद भी इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अब पायलट खेमा सक्रिय हो गया है और जल्द से जल्द इन नेताओं पर कार्रवाई की मांग कर रहा है। पायलट गुट के एक अन्य विधायक रामनिवास गावड़िया ने तो आरटीडीसी चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़ के बारे में कहा था कि वे तो मुख्यमंत्री गहलोत के चप्पल-जूते उठाते हैं। 

कांग्रेस में बसपा में आए हैं गुढ़ा  
राजेंद्र सिंह गुढ़ा बसपा में थे। वहां से वे कांग्रेस में शामिल हुए। उन्हें अशोक गहलोत खेमे का मंत्री माना जाता रहा है। हालांकि, जब से सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने की अटकलें शुरू हुई हैं, तब से उन्होंने भी पाला बदल लिया है। गुढ़ा इससे पहले भी राजनीतिक बयानबाजी को लेकर सुर्खियां बटोरते रहे हैं। गुढ़ा ने कहा कि तीनों नेताओं को उनके पद से हटाकर कांग्रेस आलाकमान को संदेश देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि निर्णय लेना कांग्रेस आलाकमान का काम है। 
 

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भले ही कांग्रेस आलाकमान ने राजस्थान के नेताओं पर बयानबाजी न करने का शिकंजा कसा हो, नेता है कि मान ही नहीं रहे। अब सचिन पायलट के समर्थक माने जाने वाले राज्यमंत्री राजेंद्र सिहं गुढ़ा ने अशोक गहलोत खेमे पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने सीधे-सीधे शांति धारीवाल, महेश जोशी और धर्मेंद्र राठौड़ पर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही कहा कि मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर आलाकमान ने जो वादा किया था, उसे पूरा करने का समय आ गया है। 

इशारों-इशारों में गुढ़ा ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को राजस्थान के मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर जल्द फैसला लेना चाहिए। अगर फैसला नहीं हुआ तो उनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल उठेंगे। कांग्रेस आलाकमान को अपनी विश्वसनीयता बचानी है तो उसे तुरंत सीएम पर फैसला लेना होगा। इससे पहले प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पार्टी के नेताओं को बयानबाजी न करने की हिदायत दी थी।  

राजस्थान के सैनिक कल्याण राज्यमंत्री गुढ़ा ने कहा कि राजनीतिक बगावत के लिए धारीवाल, महेश जोशी और धर्मेंद्र राठौड़ जिम्मेदार हैं। उनके खिलाफ अनुशासन समिति ने नोटिस जारी किया था। उस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे आम कार्यकर्ताओं को पता चलेगा कि पार्टी अनुशासन से चलेगी। बगावत करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गुढ़ा ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा था कि एक-दो दिन में प्रदेश के सीएम का फैसला कर देंगे। इसके अलावा प्रदेश के सभी मामलों को खत्म कर दिया जाएगा। प्रदेश के उलझे हुए मामले को समाप्त कर कांग्रेस के आम कार्यकर्ताओं को यह जताने का प्रयास करना चाहिए कि अब निर्णय तत्काल होंगे। इसका सीधा फायदा हिमाचल और गुजरात के चुनाव में पार्टी को मिलेगा।

धारीवाल-जोशी ने कांग्रेस विधायकों की बैठक का बहिष्कार किया था

धारीवाल और जोशी को गहलोत खेमे का माना जाता है। उन्होंने 25 सितंबर को कांग्रेस विधायक दल की बैठक का बहिष्कार किया था। इन नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद भी इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अब पायलट खेमा सक्रिय हो गया है और जल्द से जल्द इन नेताओं पर कार्रवाई की मांग कर रहा है। पायलट गुट के एक अन्य विधायक रामनिवास गावड़िया ने तो आरटीडीसी चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़ के बारे में कहा था कि वे तो मुख्यमंत्री गहलोत के चप्पल-जूते उठाते हैं। 

कांग्रेस में बसपा में आए हैं गुढ़ा  

राजेंद्र सिंह गुढ़ा बसपा में थे। वहां से वे कांग्रेस में शामिल हुए। उन्हें अशोक गहलोत खेमे का मंत्री माना जाता रहा है। हालांकि, जब से सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने की अटकलें शुरू हुई हैं, तब से उन्होंने भी पाला बदल लिया है। गुढ़ा इससे पहले भी राजनीतिक बयानबाजी को लेकर सुर्खियां बटोरते रहे हैं। गुढ़ा ने कहा कि तीनों नेताओं को उनके पद से हटाकर कांग्रेस आलाकमान को संदेश देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि निर्णय लेना कांग्रेस आलाकमान का काम है। 

 





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